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✨ भजन गायन के 35 वर्षों का आध्यात्मिक सफर ✨

जन्म और प्रारंभिक संस्कार: मेरा जन्म 17 अगस्त 1968 को भोरासा नगर में पिताश्री (स्वर्गीय) गोवर्धन लाल जी मंत्री एवं माता श्रीमती मांगी देवी मंत्री के यहाँ हुआ। आध्यात्मिक संस्कारों की नींव बचपन में ही पड़ गई थी। मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं से जुड़कर खेलकूद और शारीरिक अभ्यास के साथ-साथ संघ-गीतों की प्रस्तुति देना शुरू किया। यहीं से सुंदरकांड पाठ की गौरवशाली यात्रा का भी शुभारंभ हुआ।

सामाजिक और धार्मिक सक्रियता: वर्ष 1983 में 'बजरंग वाहिनी' के माध्यम से श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जो सिलसिला 1993 तक निरंतर चलता रहा। इस दौरान धर्म जागरण के उद्देश्य से अनेक स्थानों पर भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

शिक्षा और व्यवसाय: मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भोरासा (देवास) में पूर्ण की और उच्च शिक्षा के लिए इंदौर के गुजराती कॉमर्स कॉलेज से स्नातक किया। वर्ष 1993 में देवास (मध्य प्रदेश) में ही ऑटोपार्ट्स के व्यवसाय का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया।

भजन गायन में ख्याति: भजन गायन के क्षेत्र में मेरी पहचान देवास की आराध्य माँ चामुंडा और माँ तुलजा भवानी के दरबार से शुरू हुई। मेरी पहली सीडी (CD), जिसमें 8 भजन शामिल थे, ने सफलता के नए प्रतिमान स्थापित किए। विशेषकर "चांदी-चांदी हो गई" भजन ने मेरे जीवन को एक नई दिशा दी। देवास सहित पूरे प्रदेश में इस भजन को अपार लोकप्रियता मिली, जिसे बाद में प्रसिद्ध कंपनी T-Series ने रिलीज किया।

इसके पश्चात, 'यूनिक्स कैसेट' के बैनर तले "दीवाना राधे का", "पत्थर की राधा प्यारी" और "चामुंडा माँ का नाम लेकर काम किए जा" जैसे सुपरहिट भजनों के साथ लगभग 20 एल्बम आए।

समय के साथ तकनीक बदली और सोशल मीडिया का युग प्रारंभ हुआ। आज यूट्यूब पर वेव म्यूजिक, यूनिक्स म्यूजिक, युकी, सांवरिया और T-Series सहित मेरे अपने आधिकारिक चैनल 'द्वारका मंत्री भजन' के माध्यम से मेरे कर्णप्रिय भजन पूरे देश में गूँज रहे हैं।